कर्म से बनता है भाग्य, भाग्य से कर्म नही
ज्यादातर लोगों को हमने यह कहते हुए जरूर सुना होगा कि "मेरी तो किस्मत ही खराब है", या मेरा समय खराब चल रहा है। कुछ लोग इस बात से इक़्तेफाक रखतें भी है और कुछ लोग नही भी। अक्सर हम अपनी ज़िंदगी मे गुज़र रहे बुरे दिनों को कोसने में बहुत ज्यादा समय निकाल देते हैं, कभी भगवान को दोष देते हुए तो कभी कुंडली को। हम मानते है कि एक आदमी को सफलता हासिल करने के लिए उसके जीवन मे किस्मत और कर्म दोनों का अहम योगदान होता है, पर ज्यादा महत्वपूर्ण योगदान किसका है ये कैसे अनुमान लगाया जाए। मैं व्यक्तिगत तौर पर जीवन मे किस्मत को 20% और कर्म को 80% ही मानता हूं। मान लेते है कि किसी आदमी की किस्मत (20%) बहुत अच्छी है , पर वो अपने हिस्से का कर्म (80%) न करे तो क्या वो सफल हो सकता है। अगर इस बात को ऐसे समझने की कोशिश करें कि आपको भूख लगी है और आपकी अच्छी किस्मत की वजह से आपको अच्छा खाना भी आपके सामने थाली में परोसा हुआ मिल भी गया तो क्या आपकी भूख शांत हो जाएगी, शायद नही क्यों कि भूख शांत करने के लिए आपको अपेक्षित कर्म करना ही होगा, अपने हाथों से रोटी को तोड़ कर मुख तक पहुँचाने का कर्म तो करन...